हम किस गहराई तक अध्ययन करवाते हैं और क्यों

"यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए मुझे किसी विषय की कितनी पढाई करनी चाहिए? अध्ययन में मुझे किस गहराई तक जाना चाहिए?"

यह प्रश्न यूपीएससी के विद्यार्थियों और यूपीएससी के लिए विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने वाले शिक्षक, दोनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है।

चलिए हम  आंकडों, जानकारी, ज्ञान और समझदारी के बीच के अंतर को याद करके शुरुआत करते हैं।

आंकड़ें - वातावरण में उच्च दबाव और न्यून दबाव के क्षेत्र होते हैं।

जानकारी - बादल बनने शुरू हो रहे हैं, अतः वर्षा होगी।

ज्ञान - वर्षा होने वाली है। अपना छाता साथ ले जाएँ।

समझदारी - वर्षा होने वाली है। यदि आपके पास छाता नहीं है तो आप घर पर ही रहें।

नीचे मुख्य परीक्षा के संबंध में यूपीएससी की आधिकारिक अधिसूचना में उल्लिखित बातें नीचे दी गई  हैं-

"प्रधान परीक्षा का उद्देश्य उम्मीदवारों के समग्र बौद्धिक गुणों तथा उनके गहन ज्ञान का आकलन करना है, मात्र उनकी सूचना के भंडार तथा स्मरण शक्ति का आकलन करना नही।"

इसमें आगे कहा गया है कि "प्रश्न इस प्रकार केहोंगे जो सभी प्रासंगिक विषयों के बारे में उम्मीदवार की आधारभूत समक्ष तथा परस्पर-विरोध सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों, उद्देश्यों और मांगों का विश्लेषण तथा इन पर दृष्टिकोण अपनाने की क्षमता का परीक्षण करें. उम्मीदवार संगत, सार्थक तथा सारगर्भित उत्तर दें।"

उपरोक्त दो उद्धृत अंशों से स्पष्ट है कि जैसा ऊपर उल्लेख किया गया है, इस परीक्षा में विद्यार्थी का न्यूनतम अपेक्षित स्तर कम से कम आंकड़ों से अधिक उच्च होना चाहिए। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों से यह भी अपेक्षित है कि वे अपने ज्ञान को प्रासंगिक और तर्कसंगत, अर्थपूर्ण और सटीक उत्तरों में परिवर्तित कर पाने में सक्षम हों। अतः हमने हमारे सभी अध्ययनों में बुद्धिमत्ता के संभावित उच्चतम स्तर को लक्षित करने का निर्णय लिया। जब तक व्यक्ति आंकड़ों और जानकारी के स्तर से ऊपर नहीं उठेगा और जब तक वह ज्ञान और समझदारी के अगले स्तर तक नहीं जायेगा तब तक उसके लिए बिंदुओं को जोडना और यूपीएससी मुख्य परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना संभव नहीं हो पायेगा।

दूसरी बात यह है कि जब विद्यार्थी यूपीएससी की परीक्षा में शामिल होने का निर्णय लेता है तो यह मान लिया जाता है उसका एक अन्तर्निहित स्तर है जो विद्यार्थी के पास पहले से मौजूद है और इसी के साथ वह सहायता के लिए किसी प्रशिक्षण संस्था के पास जाता है। हमारी पूर्वधारणा सरल है। विद्यार्थी शून्य के जमीनी स्तर पर है। अतः हमारा उद्देश्य किसी भी दिए गए विषय में उसे आंकड़ों के अलावा के स्तर से ज्ञान के स्तर तक ले जाना है। यह किस प्रकार से सहायता करता है? हमारा अनुभव कहता है कि परीक्षा में विद्यार्थी उसने जो भी  पढ़ा व जाना है उसका 50 प्रतिशत याद रख सकता है और इसमें से भी केवल 50 प्रतिशत लिख पाने में सक्षम होता है। अतः उसे अधिक से अधिक जानने की आवश्यकता होती है।

अतः यदि हम कोई विषय पढाते हैं जिसमें कक्षा में दिए गए नोट्स में लगभग 1000 शब्द हैं और विद्यार्थी इनमें से 500 याद रख पाता है, और परीक्षा में वह इसे 150 से 200 अर्थपूर्ण शब्दों में संक्षिप्त कर सकता है जिससे कि एक तर्कसंगत और उत्तर बन सके। परंतु यदि हम वही विषय इस प्रकार पढ़ाएं कि उसके कक्षा में दिए गए नोट्स केवल 150 शब्दों तक ही सीमित हैं तो परीक्षा में उसका अंतिम उत्तर 50 शब्दों से भी छोटा रहने की संभावना है।

हमारा दृष्टिकोण यह है - किसी भी विषय को पर्याप्त गहराई तक कवर करें ताकि बिंदुओं को जोडना (कनेक्टिंग-द-डॉट्स) संभव हो सके। यदि विद्यार्थी को मुख्य परीक्षा में (और प्रारंभिक परीक्षा में भी) संभावित प्रश्नों के बिना किसी रूकावट के आसानी से उत्तर देने में महारत प्राप्त करनी है तो किसी भी विषय को अन्य अनेक विषयों के साथ एक जोडने वाले पुल का कार्य करना चाहिए। केवल सतह को खुरच कर कौशल निर्माण के इस स्तर को प्राप्त करना असंभव है।

उम्मीदवार के लिए मुख्य परीक्षा में किया गया हाल का परिवर्धन और सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र कौन सा है इसपर एक नजर डाली जाये - विश्व का इतिहास। यह विशिष्ट प्रश्न मुख्य परीक्षा 2013 के सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र में पूछा गया था।

प्रश्न अमेरिकी क्रांति, वणिकवाद के विरुद्ध एक आर्थिक विद्रोह था।" इस कथन की पुष्टि कीजिये।

यह विषय (अमेरिकी क्रांति) एक गंभीर विद्यार्थी या शिक्षक के लिए आमतौर पर अनेक वर्षों के अनुसंधान का समय लेता है। अब मुख्य परीक्षा में पूछा गया यह प्रश्न अमेरिकी क्रांति के कब और कैसे से संबंधित नहीं है। बल्कि यह क्यों से संबंधित है। इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए विद्यार्थी को अमेरिकी क्रांति के कारणों पर काफी गहराई तक जाकर अध्ययन करना आवश्यक है। यदि विद्यार्थी को वास्तव में इस विषय को समझना है तो एक छोटा सा सत्र काफी नहीं होगा। उसी प्रकार, सारी सामग्री और जानकारी होते हुए भी यदि लिखने का अभ्यास नहीं है तो भी काम चलने वाला नहीं है। एक प्रभावी उत्तर लिखने और अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को अमेरिकी क्रांति को काफी गहराई से समझना होगा साथ ही उसे काफी अधिक लिखने का अभ्यास भी करना होगा।

हमने उदाहरण के तौर पर एक प्रश्न लिया है। परंतु यूपीएससी मुख्य परीक्षा में पूछे जाने वाले लगभग सभी प्रश्नों के बारे में यह सही है। और ध्यान रहे कि अमेरिकी क्रांति सामान्य अध्ययन के पाठ्यक्रम में उल्लेख की गई अनेक घटनाओं में से केवल एक घटना है। इस संपूर्ण इकाई का स्पष्टीकरण निम्नानुसार है "विश्व इतिहास में औद्योगिक क्रांति, दोनों विश्व युद्ध, देशों की सीमाओं का पुनर्निर्माण, उपनिवेशन पूर्व उपनिवेशों की स्वतंत्रता, जैसी 18 वीं सदी के बाद की घटनाएं, साम्यवाद, पूंजीवाद,समाजवाद इत्यादि जैसे राजनीतिक दर्शन और उनके स्वरुप और समाज पर पडने वाले प्रभाव शामिल होंगे।"

इस इकाई में यहां तक कि अमेरिकी क्रांति के नाम का उल्लेख भी नहीं है। हालांकि हमने अमेरिकी क्रांति पर एक पूरा व्यापक और सघन सत्र किया था जिसमें इस विषय पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई थी। साथ ही इस ज्ञान का उपयोग अन्यत्र भी किया जा सकता है। उदाहरणार्थ अमेरिकी गृह युद्ध पर आयोजित 2 व्याख्यानों में हमने अब्राहम लिंकन के गैटिसबर्ग संबोधन को भी शामिल किया था। हालांकि सामान्य अध्ययन में अमेरिकी गृह युद्ध पर कोई भी प्रश्न नहीं पूछा गया था परंतु सामान्य अध्ययन 4 में विद्यार्थियों को "लगभग सभी लोग विपत्ति का सामना कर सकते हैं पर यदि किसी के चरित्र का परीक्षण करना है, तो उसे शक्ति/अधिकार दे दो" -अब्राहम लिंकन की उक्ति पर 150 शब्द लिखने के लिए कहा गया था।

लिंकन के भाषणों और उद्धरणों पर हमने जो निविष्टियां दी थीं, जो सामान्य देखने वाले को फालतू लग सकती हैं, परंतु वे विद्यार्थियों के लिए उत्तर देने की दृष्टि से काफी काम आईं।

चलिए हम सोचते हैं कि इस विषय पर और क्या पूछा जा सकता है। संभावित प्रश्न निम्नानुसार हो सकते हैं :

  1. अमेरिकी गृह युद्ध में अब्राहम लिंकन द्वारा दिया गया  योगदान भारतीय लोकतंत्र के लिए किस प्रकार प्रासंगिक है?
  2. हाल के समय में भारत की कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संबंध बहस का विषय रहे हैं अब्राहम लिंकन के जीवन का कौन सा उदाहरण अमेरिकी राजतन्त्र में हुए इसी प्रकार के संकट को प्रदर्शित करता है?
  3. अमेरिकी गृह युद्ध को अमेरिकी इतिहास की सबसे रक्त रंजित घटना क्यों माना जाता है? इसका संबंध 1970 के दशक के वियतनाम युद्ध के साथ स्थापित करें।
  4. हाल के समय में (2015) अमेरिका में दक्षिण से आने वाले संघाधीन नेताओं के विरुद्ध काफी विषवमन देखा गया है। अमेरिकी गृह युद्ध के संदर्भ में इस मुद्दे का परीक्षण करें।

कक्षा सत्रों में दी गई निविष्टियों को इन सभी प्रश्नों के सीधे उत्तर देने के लिए उपयोग किया जा सकता है। इस प्रकार विशेष महत्त्व की घटनाओं में एक लकीर खींचना, जो किसी विषय की केवल सतह को कुरेदती है, एक सही विचार नहीं कहा जा सकता। एक विशिष्ट गहराई तक विषय का समावेश आवश्यक है ताकि बिंदुओं को जोडना वास्तव में संभव हो सके।

अंत में यूपीएससी परीक्षा में एक बात ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है -"नहीं पूछना उनका अधिकार है, हमारा कर्तव्य गहराई तक अध्ययन करना है।"

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आपको अनेक शुभकामनाएं!

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